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जयपुर बस हादसे के बाद इमरजेंसी गेट लगवा रहे ऑपरेटर्स:ड्राइवर बोले- इससे ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता, असली वजह खुली वायरिंग

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जयपुर और जैसलमेर में हुए बस अग्निकांड के बाद कारखानों में स्लीपर बस की संख्या बढ़ गई है। बस ऑपरेटर्स आनन-फानन में इमरजेंसी गेट लगवाने पहुंच रहे हैं। बस में पीछे ही नहीं, साइड में भी इमरजेंसी गेट बनाए जा रहे हैं।

दैनिक भास्कर की टीम भी बस बॉडी के कारखानों में पहुंची। इस दौरान बस के हालात और आग करने के कारणों को जाना।

स्लीपर बसों में इमरजेंसी गेट निकाले जा रहे हैं। इसके लिए बस बॉडी के कारखानों में ऑपरेटर्स पहुंच रहे हैं।
स्लीपर बसों में इमरजेंसी गेट निकाले जा रहे हैं। इसके लिए बस बॉडी के कारखानों में ऑपरेटर्स पहुंच रहे हैं।

बसों में इमरजेंसी गेट लगवाने पहुंच रहे ऑपरेटर्स

भास्कर टीम सबसे पहले दिल्ली रोड स्थित खोले के हनुमान जी का रास्ता से थोड़ी ही दूरी पर स्थित बस बॉडी कारखानों में पहुंची। यहां बड़े स्तर पर इमरजेंसी गेट बसों की पीछे की बॉडी को काटकर बनाए जा रहे थे। यहां काम कर रहे मजदूरों ने बताया- जयपुर के आसपास बस में आग लगने के बाद बड़ी संख्या में बस मालिक अपनी बसों को इमरजेंसी गेट निकलवा रहे हैं।

इससे पहले बगल में इमरजेंसी गेट होता था। उस पर बस ऑपरेटर ही वेल्डिंग करवा देते थे। लेकिन अब न केवल बगल में, बल्कि पीछे भी इमरजेंसी गेट निकलवा रहे हैं।

वेल्डिंग कर बंद किए गए इमरजेंसी दरवाजों को फिर से खुलवाया जा रहा है।
वेल्डिंग कर बंद किए गए इमरजेंसी दरवाजों को फिर से खुलवाया जा रहा है।

बॉडी बनाने वाले बोले- आग लगने मुख्य वजह वायरिंग

बस बॉडी कारखाने में काम कर रहे यूसुफ ने बताया- बसों में आग लगने की घटनाओं की मुख्य वजह वायरिंग है। बस के आगे खुली कमजोर वायरिंग की वजह से बसों में आग लगती है। कंपनी की ओर से जो फ्रंट में वायरिंग खुली छोड़ दी जाती है। इसके कारण चिंगारी से बस आग पकड़ लेती है।

इस संबंध में कई बार परिवहन विभाग को बताया गया। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। परिवहन विभाग सेकेंड डोर को लेकर बस चालकों पर कार्रवाई कर रहा है। इससे बेहतर अगर कंपनी की चेसिस वायरिंग को लेकर काम किया जाए तो आग लगने पर कंट्रोल किया जा सकता है।

बस ड्राइवर बोले- सेकेंड इमरजेंसी डोर से कोई फर्क नहीं पड़ेगा

कारखाने में इमरजेंसी गेट बनवाने आए ड्राइवर बद्री नारायण चौधरी ने बताया- परिवहन विभाग की ओर से सेकेंड इमरजेंसी डोर न होने पर बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। जितनी बस होती है, उनके शीशे इस स्तर पर होते हैं कि उनको एक मुक्के से भी तोड़ा जा सकता है। दूसरे दरवाजे की जरूरत नहीं है। बस में कोई भी दुर्घटना होती है तो घबराहट की वजह से हादसे होते हैं। शीशे तोड़कर यात्री बाहर कूदें तो दुर्घटना से बच सकते हैं। इमरजेंसी दरवाजे को लेकर कहा- इससे ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता।

बस ऑपरेटर्स का कहना है कि यूरो सिक्स बसों में खुली कमजोर वायरिंग आग लगने जैसी वजहों का कारण है।
बस ऑपरेटर्स का कहना है कि यूरो सिक्स बसों में खुली कमजोर वायरिंग आग लगने जैसी वजहों का कारण है।

पहले की बसों में आगे नहीं होती थी वायरिंग

बस ऑपरेटर और प्राइवेट बस यूनियन उपाध्यक्ष ट्रांसपोर्ट नगर महेश गुप्ता ने बताया- अब तक जितनी भी गाड़ियों में आग लगी है, वह यूरो सिक्स (Euro 6) में लगी है। क्योंकि इस कंपनी की वायरिंग आगे बोर्ड पर इंजन पर होती है। ये वायरिंग बिल्कुल हल्की होती है। इससे इन गाड़ियों मे ज्यादा आग की घटनाएं हो रही हैं।

उन्होंने दावा किया कि कंपनियां इसको लेकर काम करे तो इस तरह के हादसे बंद हो सकते हैं। यूरो 4 (Euro 4) की किसी गाड़ी में आज तक आग नहीं लगी है। सिर्फ यूरो सिक्स में ही आग लगती है। राजस्थान रोडवेज की बसें यूरो 4 की हैं। इसमें बस के आगे खुली वायरिंग नहीं है।

राजस्थान रोडवेज यूरो 4 की बस इस्तेमाल करती है। इन बसों में आगे खुली वायरिंग नहीं है।
राजस्थान रोडवेज यूरो 4 की बस इस्तेमाल करती है। इन बसों में आगे खुली वायरिंग नहीं है।

यूरो सिक्स की एक गाड़ी की कीमत 70 लाख के करीब पड़ रही है। जबकि यूरो 4 गाड़ी 45 लाख रुपए की ही आती थी। दोनों में रेट का इतना अंतर होने के बावजूद यूरो सिक्स की वायरिंग काफी कमजोर दी गई है।

इसके बाद भास्कर टीम दिल्ली रोड स्थित नई माता के पास बस बॉडी कारखाने में पहुंची। यहां कारखानों के लाइसेंस के संबंध में सूचना मांगने पर मजदूरों ने मालिक के नहीं होने की बात कही।

रामगढ़ मोड़ चूंगी के पास यात्रियों से भरी ओवरलोड बस का चालान किया गया।
रामगढ़ मोड़ चूंगी के पास यात्रियों से भरी ओवरलोड बस का चालान किया गया।

बस की छतों पर बैठे दिखे यात्री

इस दौरान भास्कर टीम ने बसों की लाइव स्थिति देखी। चूंगी रामगढ़ मोड़ से शाहपुरा (जयपुर) जा रही बस में यात्रियों को ठूंस-ठूंस कर भरा था। बस की छत पर बड़ी संख्या में यात्रियों को बैठा रखा था। भास्कर टीम ने चूंगी पर तैनात पुलिस अधिकारी को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने मानबाग में तैनात पुलिसकर्मियों को सूचना देकर वहां बस को रुकवाकर छत से यात्रियों को उतरवाया। ओवरलोड वाहन चलाने पर चालान किया।

इस दौरान बस में सवार कुछ यात्रियों ने प्रशासन पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा- सरकार को चार बसें और चलानी चाहिए। बसें हैं ही नहीं तो कैसे जाएंगे। ऐसे ही जाना होगा। कम बसें हैं, तभी तो प्राइवेट बसों में भरकर जाना पड़ता है।

बस में सवार अशोक कुमार ने बताया- बसों में इस तरह भरकर आना हमारी मजबूरी है। क्योंकि हमारे रूट पर दो रोडवेज बसे हैं। हमारी मांग है कि इस रूट पर रोडवेज बस चलें तो हम जान जोखिम मे डालकर यात्रा न करें।

एएसआई नवल किशोर ने कार्रवाई के दौरान ही बताया- बस ऑपरेटर परमिट के अनुसार ही सवारी बैठा सकते हैं। परमिट की शर्तों का उल्लंघन है जिस पर चालान करके मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

जयपुर में 100 से ज्यादा बस बॉडी के कारखाने हैं। यहां बसें इमरजेंसी गेट बनवाने के लिए पहुंच रही हैं।
जयपुर में 100 से ज्यादा बस बॉडी के कारखाने हैं। यहां बसें इमरजेंसी गेट बनवाने के लिए पहुंच रही हैं।

जयपुर में 100 से ज्यादा बस बॉडी बनाने के कारखाने

जयपुर में करीब 100 से ज्यादा बस बॉडी बनाने के कारखाने हैं। इनमें देखने में आया कि हर कारखाने में 20 से ज्यादा गाड़ियां बैक डोर और साइड डोर निकलवाने के लिए खड़ी थी। ट्रैवल्स बस कारखानों में 17 नंबर सर्टिफिकेट जरूरी है। लेकिन नहीं मिलता है। साधारण बसों में दो इमरजेंसी गेट होने चाहिए, लेकिन नहीं बन रहे। 71 इंच का स्लीपर होना चाहिए, लेकिन इसकी लंबाई भी 50 इंच कर दी गई है। गैलरी की चौड़ाई 27 इंच की जगह 20 इंच कर दी। सीटों के बीच अंतर भी कम कर दिया।

बसों की बॉडी यहां बनती है और बस ऑपरेटर्स उसे दूसरे राज्यों से पास करा लेते हैं। 12 मीटर लंबे चेसिस पर पांच स्लीपर के बॉक्स ही बन सकते हैं। लेकिन पांच से सात फीट तक बढ़ाकर 6 स्लीपर तक बढ़ा रहे हैं। बस झूलती रहती है। इसमें 7-8 यात्री ज्यादा बैठ सकते हैं।

M 24x7 News
Author: M 24x7 News

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