best news portal development company in india

जमीन पर कब्जे के मामले में बड़ा खुलासा:अवैध कब्जों में भाजपा जिला उपाध्यक्ष का बेटा व मंडल अध्यक्ष भी, कई भूखंड सरकारी कर्मचारियों के

SHARE:

शहर के ट्रांसपोर्ट नगर से सटे बड़ीगढ़, कोटलिया फला (सवीनाखेड़ा) में यूडीए की 110 करोड़ जमीन से ध्वस्त किए 102 अवैध कब्जों के मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। कांग्रेस व बीएपी उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, शहर भाजपा जिला उपाध्यक्ष तख्त सिंह शक्तावत, सरदार पटेल मंडल अध्यक्ष अमृत मेनारिया और सवीना सरपंच ईश्वर गमेती पर इस जमीन को खुर्दबुर्द करने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इस बीच भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि इस जमीन पर अवैध कब्जों में भाजपा नेता तख्तसिंह के बेटे देवेंद्र सिंह, मंडल अध्यक्ष मेनारिया ने भी भूखंड की खरीद-फरोख्त की थी।

इन कब्जाशुदा भूखंडों पर बिजली कनेक्शन के लिए सवीना ग्रामीण के भाजपा समर्थित सरपंच ईश्वर गमेती ने अवैध तरीके से अनापत्ति प्रमाण-पत्र बांटे। शक्तावत के बेटे देवेंद्र सिंह ने साल 2024 में कोड़ियों के दाम एक आदिवासी से भूखंड खरीदा था, जो सिर्फ कब्जाशुदा है। ऐसे ही मेनारिया ने साल 2025 में मात्र 5.70 लाख रुपए में आदिवासी से भूखंड खरीदा। इन भूखंडों की अभी तक न किसी के नाम रजिस्ट्री है, न पट्टा। 40 से ज्यादा भूखंडों के मिले दस्तावेजों में भी इसी तरह कब्जे करना सामने आया है। हालांकि, इस पूरे मामले में अभी तक ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा व उनके परिजनों की कोई भूमिका सामने नहीं आई है।

कब्जे करने वालों में पुलिस जवान, शिक्षक और अन्य कर्मचारी भी अवैध कब्जे करने वालों में कई सरकारी कार्मिक भी शामिल हैं। इनमें 5 पुलिस जवान, 5 शिक्षक, 3 एवीवीएनएल-पीएचईडी के कर्मचारी सहित अन्य 20 से ज्यादा कार्मिकों के नाम सामने आ रहे हैं। इसी भूमि से सटी यूडीए की जमीन पर 100 से ज्यादा कोटडियां बन चुकी हैं। इनमें लोग रह रहे हैं। इनमें ज्यादातर किरायेदार हैं। कोटड़ी मालिक कार्मिक व अन्य सम्पन्न लोग शहर में ही अपने अन्य आवासों/निवासों में रहते हैं। यूडीए ने अभी उन 102 निर्माणों को ध्वस्त किया है, जिनमें वर्तमान में कोई भी निवासरत नहीं था।

सफाई- हमने कीमत दी, सवाल- कब्जे खरीदे ही क्यों?

मेनारिया : 5.70 लाख में 1700 वर्गफीट प्लॉट

मंडल अध्यक्ष मेनारिया ने 500 रुपए के स्टांप पर 5.70 लाख में 1700 वर्ग फीट भूखंड खरीदा था। इसे नेला के कंजड़ी फला निवासी हिम्मत गमेती से 27 जनवरी 2025 को खरीदा था। विक्रय इकरारनामा में स्पष्ट लिखा है कि यह भूखंड कब्जाशुदा है।

  • सफाई : यूआईटी पैराफेरी की पंचायतों में भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं, इकरार होते हैं। मैंने 5.70 लाख रु. खर्च किए। इसके अलावा किसी भी भूखंड से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।

शक्तावत : 3 लाख में 1800 वर्गफीट भूखंड

शहर भाजपा जिला उपाध्यक्ष शक्तावत के बेटे देवेंद्र सिंह ने 12 मई 2024 को 3 लाख में भूखंड खरीदा। यह 1800 वर्ग फीट था। इसे हेमा गमेती से खरीदा। इकरार में लिखा है कि यह प्लॉट कभी भी अवाप्त किया जाता है तो विक्रेता इसका जिम्मेदार नहीं होगा।

  • सफाई : तख्त सिंह का कहना है कि बेटे ने रुपए देकर पंचायतों के नियमानुसार भूखंड खरीदा। अन्य किसी भूखंड की खरीद-फरोख्त से उनके बेटे का कोई लेना-देना नहीं है।

सरपंच : कब्जेधारियों को स्थानीय बताकर दी NOC

सवीना ग्रामीण सरपंच ईश्वर ने अवैध कब्जाधारियों को बिजली कनेक्शन दिलाने में मदद की। उन्होंने हर एनओसी में कब्जेधारी का नाम लिखते हुए लिखा है कि ये बड़ीगढ़ निवासी हैं। इनको बिजली कनेक्शन दे तो पंचायत को कोई आपत्ति नहीं है।

  • सफाई : ईश्वर का कहना है कि जब से पंचायतें गठित हुईं हैं, तबसे ऐसे ही बिजली कनेक्शन दिलाने की प्रक्रिया अपना रही हैं। मैंने एनओसी नियमानुसार ही जारी की।

जिम्मेदारों से सीधे सवाल ताराचंद जैन, शहर विधायक

यूडीए की कार्रवाई पर सभी सवाल उठा रहे हैं, आप क्या कहेंगे? किसी भी सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द करना गलत है। यूडीए की कार्रवाई से जनता और सरकार में अच्छा संदेश गया है। अगर कोई आदिवासी काफी सालों से इस जगह पर निवासरत था तो उसका आवास ध्वस्त नहीं करना चाहिए था। अगर ऐसा नहीं किया गया है तो यह अच्छी बात है।

-फूलसिंह, ग्रामीण विधायक

110 करोड़ की सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द कराने में कांग्रेस और बीएपी आप पर सार्वजनिक आरोप लगा रही है? आरोप निराधार हैं। मेरे व किसी भी परिजन के नाम कोई भी 1 इंच जमीन नहीं बता सकता है। मेरी राजनीतिक छवि खराब करने का षड्यंत्र रचा गया है। आदिवासियों को बेदखल करने की वजह से यूडीए की कार्रवाई का विरोध में करता आ रहा हूं।

-राहुल जैन, यूडीए आयुक्त

सरकारी भूमि को खुर्दबुर्द किया तो केस दर्ज क्यों नहीं करा रहे, कोई राजनीतिक दबाव है? यूडीए की इस भूमि पर 2013 में किसी का भी कब्जा नहीं था। गूगल मैप में इस बात की पुष्टि हो चुकी है। इसके बाद अवैध कब्जे हुए हैं। हम मुकदमा दर्ज कराने की पूरी तैयार कर चुके हैं। मुझे किसी का भी राजनीतिक दबाव महसूस नहीं होता है।

-केआर मीना, एवीवीएनएल एसई

एवीवीएनएल ने कोटड़ियां व कब्जे अवैध होने के बावजूद बिजली कनेक्शन कैसे दे दिए? पंचायत से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मिलने पर कनेक्शन देने का प्रावधान हैं। हमने भी इसीलिए दिए थे। यूडीए की शिकायत मिलने के तुरंत बाद सभी कोटड़ियों के कनेक्शन काट दिए गए। ऐसे मामलों में पारदर्शिता कैसे लाई जा सकती है। एवीवीएनएल इस मुद्दे पर विचार कर रहा है।

साल 2020 तक खाली थी भूमि, पांच साल में बस गई पूरी कॉलोनी विक्रेता-खरीदारों को भूमि के सरकारी होने की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने सौदे किए। यूडीए की इस 110 करोड़ की जमीन की साल 2013 की गूगल सेटेलाइट इमेज में यह साफ दिखाई दे रहा है कि यहां 2013 में कोई कब्जा नहीं था। साल 2020 तक लगभग पूरी भूमि खाली थी, लेकिन साल 2023 से 2025 के बीच इस पूरी भूमि पर अवैध कब्जे हो गए। पिछले 5 साल में 1-1 कोटियों के भूखंडों की कॉलोनी बसा दी गई।

बिना आबादी कैसे बन गई पानी की टंकी… ये सबसे बड़ा सवाल हैरानी की बात यह है कि यहां पंचायत ने पानी की विशाल टंकी बनवा दी। जबकि यहां कोई बस्ती तक नहीं थी। इस टंकी के निर्माण को अवैध कब्जों के खेल के पूर्व नियोजित प्लान की तरह देखा जा रहा है। जबकि, पास में ट्रांसपोर्ट नगर में आवश्यकता होने के बाद भी पानी की टंकी नहीं बनाई गई। बता दें कि यूडीए ने गत 6 नवंबर को 52 निर्माण ध्वस्त किए थे। इनमें अधिकांश कोटड़ी और बाउंड्रीवाल थीं। 50 प्लॉट की बाउंड्रीवॉल ध्वस्त की थीं। न किसी भवन में कोई परिवार निवासरत था, न कोई इन प्लॉट्स में रह रहा था।

M 24x7 News
Author: M 24x7 News

Leave a Comment

best news portal development company in india
best news portal development company in india
सबसे ज्यादा पड़ गई