जोधपुर के एक व्यापारी के साथ एमएसटीसी लिमिटेड के सरकारी पोर्टल पर स्टेनलेस स्टील स्क्रैप बेचने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने इस संबंध में इंदौर स्थित पीगासस इनलैण्ड कंटेनर डिपो के निदेशक एवं मैनेजर के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।।
बासनी निवासी मोहम्मद शाहिद ने न्यायालय परिवाद के जरिए बासनी थाने में दी रिपोर्ट में बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में एमएसटीसी पोर्टल पर 26.800 टन SHREDDED STAINLESS STEEL SCRAP (Zurik Grade) की नीलामी प्रस्तावित थी। विक्रेता के रूप में इंदौर स्थित कंपनी का नाम और अधिकृत व्यक्तियों के रूप में निदेशक हरीश शर्मा एवं मैनेजर अरुण कुमार दर्ज थे।
माल की वेबसाइट पर फोटो उपलब्ध न होने पर परिवादी ने आरोपियों से मोबाइल पर संपर्क किया। आरोप है कि अरुण कुमार ने बार-बार भरोसा दिलाया कि माल शुद्ध स्टेनलेस स्टील है। चुम्बक लगाने पर किसी भी स्थिति में नहीं चिपकेगा। बाद में निदेशक हरीश शर्मा ने भी दावा किया कि माल वास्टस विभाग एवं कस्टम से प्रमाणित है।विश्वास में आने पर पीड़ित ने 5 सितंबर 2025 की नीलामी में भाग लिया और अंतिम बोलीदाता होने पर कुल ₹16,24,462 सहित सेवा शुल्क आदि जमा करवा दी।
स्क्रैप में 1% भी स्टील नहीं मिला
आरोपियों के कई दिनों तक कस्टम क्लियरेंस का बहाना बनाने के बाद 30 अक्टूबर को पीड़ित के पास माल लेने का फोन आया। 3 नवंबर को पीड़ित अपने दो साथियों के साथ जब इंदौर के गोदाम पहुंचे, तो वहां देखा कि स्टेनलेस स्टील स्क्रैप की जगह पूरा कचरा पड़ा था। पीड़ित के अनुसार माल में 1 प्रतिशत भी स्टील नहीं था। पीड़ित ने रबिश माल (कचरे की माफिक) की आपत्ति जताने पर आरोपियों ने कथित रूप से कहा कि नीलामी से पहले ही “जैसी स्थिति में है” लिख दिया गया था, इसलिए शिकायत का कोई मतलब नहीं है।
कस्टम प्रमाणपत्र दिखाने से भी मुकर गए
जब पीड़ित ने कस्टम NOC दिखाने को कहा, तो आरोपी टालते रहे और कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। इस पर उसने एमएसटीसी और आरोपी दोनों को ईमेल भेजकर राशि वापसी की मांग की। आरोपियों ने जवाब दिया कि “माल जैसी स्थिति में था, वैसा ही बेचा गया है।” इसलिए अब कोई शिकायत नहीं की जा सकती। एमएसटीसी ने भी आरोपियों को कस्टम एनओसी पीड़ित को देने के लिए कहा लेकिन नहीं दिया। पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने पूर्वनियोजित साजिश रची थी जिससे महंगा स्टील स्क्रैप बताकर कचरा बेचकर राशि हड़पी जा सके।






